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राज्यसभा में सांसद श्रीमती माया नारोलिया जी ने सदन में ‘वन्दे मातरम्’—150वें वर्ष की चर्चा में भाग लिया।

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नई दिल्ली। आज वन्दे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर आज राज्यसभा में एक विशेष चर्चा के दौरान सांसद माया नारोलिया ने सदन में अपने भावपूर्ण संबोधन में उन्होंने कहा कि वन्दे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारतीय स्वाधीनता संग्राम की आत्मा और सांस्कृतिक चेतना का शाश्वत प्रतीक है।

सांसद नारोलिया ने कहा कि “बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित यह गीत भारत के राष्ट्रीय आंदोलन की धड़कन रहा है। अंग्रेज़ी शासन में बार-बार प्रतिबंधित किए जाने के बावजूद यह गीत जन-जन की प्रेरणा बना रहा।”

राष्ट्रीय आंदोलन की ‘भावनात्मक आत्मा’ बताया गीत को

नारोलिया ने अपने संबोधन में स्वदेशी आंदोलन, सत्याग्रह और स्वतंत्रता संघर्ष के कठिन दौर का उल्लेख करते हुए कहा कि वन्दे मातरम् ने आंदोलनकारियों को साहस और एकता का भाव प्रदान किया। यह गीत केवल नारा नहीं बल्कि सांस्कृतिक प्रतिरोध की ध्वजा रहा, जिसे दमन और प्रतिबंध झेलते हुए भी आंदोलनकारियों ने निर्भय होकर गाया।

मोदी सरकार के सांस्कृतिक पुनर्जागरण की सराहना

सांसद ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व की प्रशंसा करते हुए कहा कि आज देश में सांस्कृतिक पुनर्जागरण की नई हवा बह रही है। काशी विश्वनाथ धाम, अयोध्या धाम, महाकाल कॉरिडोर सहित अनेक परियोजनाओं को उन्होंने सांस्कृतिक गौरव के प्रतीक बताया। उनके अनुसार, “वन्दे मातरम् केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि वर्तमान भारत की जीवित आत्मा है।”

सरकारी नीतियों को ‘मातृभाव’ से जोड़ा

नारोलिया ने जल जीवन मिशन, उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत और स्वच्छ भारत मिशन को वन्दे मातरम् के मातृभाव से जोड़ते हुए कहा कि ये योजनाएँ भारतीय परिवार, स्त्री-शक्ति और मातृभूमि के सम्मान से जुड़ी हैं।

विवादों को बताया दुर्भाग्यपूर्ण

उन्होंने सदन में यह भी कहा कि कुछ राजनीतिक शक्तियों ने समय-समय पर वन्दे मातरम् को विवादों में घसीटने का प्रयास किया है, लेकिन यह गीत किसी राजनीतिक मतभेद का विषय नहीं बल्कि भारतीयता की साझा पहचान है।

युवाओं को संदेश— ‘भारत केवल राज्य नहीं, एक सभ्यता है’

सांसद माया नारोलिया ने आगामी पीढ़ियों को संबोधित करते हुए कहा कि वन्दे मातरम् में जो त्याग, साहस, श्रद्धा और मातृ-भक्ति का संदेश है, वही भारत के भविष्य की दिशा तय करेगा।

उन्होंने कहा—“हम केवल राष्ट्र के नागरिक नहीं, बल्कि मातृभूमि के पुत्र-पुत्री हैं। वन्दे मातरम् हमारा अमर राष्ट्रीय मंत्र है।”

अंत में दिया राष्ट्रभक्ति का उद्‍घोष

अपने संबोधन के अंत में सांसद ने मातृभूमि और भारतीय सभ्यता को नमन करते हुए स्पष्ट कहा कि वन्दे मातरम् सदैव भारतीय राष्ट्रीय जीवन का अमर उद्घोष बना रहेगा।

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