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भोपाल में अब गांवों में भी कार्बाइड गन पर पूरी तरह बैन: कलेक्टर ने जारी किया आदेश, खरीद-बिक्री, भंडारण और परिवहन पर रोक

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फोटो: Sgbot321 / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0 (Upper Lake, Bhopal - प्रतीकात्मक)

दिवाली से पहले भोपाल प्रशासन ने खतरनाक कार्बाइड गन के खिलाफ सख्ती और बढ़ा दी है। कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने गुरुवार (29 अक्टूबर) को प्रतिबंधात्मक आदेश जारी कर जिले के ग्रामीण इलाकों में कार्बाइड गन, कार्बाइड तोप और कार्बाइड लैंप के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। आदेश के तहत इन उपकरणों की खरीद-बिक्री, भंडारण, प्रदर्शन और परिवहन भी प्रतिबंधित रहेगा।

शहर के बाद अब गांव भी दायरे में

भोपाल शहर में कमिश्नरेट प्रणाली लागू है, जहां पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने 26 अक्टूबर को ही ऐसा आदेश जारी कर दिया था। वह आदेश जारी होने की तारीख से दो महीने तक प्रभावी रहेगा। कलेक्टर के ताजा आदेश के बाद अब पूरे भोपाल जिले, यानी शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में कार्बाइड गन पर रोक लागू हो गई है।

आदेश में क्या-क्या है

  • कार्बाइड गन, तोप, लैंप और लोहे, स्टील या PVC पाइप में विस्फोटक भरकर बनाए गए तेज आवाज वाले उपकरणों पर रोक।
  • इनका निर्माण, मरम्मत, असेंबलिंग, खरीद, बिक्री, भंडारण, वितरण और आपूर्ति प्रतिबंधित।
  • कैल्शियम कार्बाइड सिर्फ वैध कृषि और औद्योगिक कामों के लिए बेचा जा सकेगा।
  • विक्रेताओं को कैल्शियम कार्बाइड की खरीद-बिक्री का पूरा रिकॉर्ड रखना होगा।
  • उल्लंघन पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223 के तहत कार्रवाई होगी।

यह आदेश भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 163 के तहत जारी किया गया है।

क्यों जरूरी हुआ प्रतिबंध

प्रशासन के मुताबिक, कार्बाइड गन का तेज धमाका कान के पर्दे फाड़ सकता है, आंखों की रोशनी छीन सकता है और चेहरे व शरीर पर गंभीर जलन पैदा कर सकता है। बच्चों के लिए यह सबसे ज्यादा जोखिम भरा है। रिपोर्टों के अनुसार, पिछले साल (2025) दिवाली के दौरान मध्य प्रदेश में करीब 300 लोग कार्बाइड गन से घायल हुए थे या उनकी आंखों को नुकसान पहुंचा था। भोपाल के साथ विदिशा, सागर और सीहोर जिलों से भी ऐसे मामले सामने आए थे।

प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे ऐसे उपकरणों का इस्तेमाल न करें और कहीं इनकी बिक्री दिखे तो पुलिस को सूचना दें।

स्रोत: भोपाल पुलिस कमिश्नर का आदेश (26 अक्टूबर 2026), दैनिक भास्कर, IANS और फ्री प्रेस जर्नल की रिपोर्ट।

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