भावी पीढ़ियों के लिए धारणीय शहरीकरण का नया रोडमैप: नई दिल्ली में संसदीय समिति की बैठक में सांसद माया नारोलिया ने जीआईएस-आधारित मास्टर प्लानिंग पर दिया बल
नर्मदापुरम। देश के तीव्र नगरीय संक्रमण को एक सुव्यवस्थित, पर्यावरण-अनुकूल और संधारणीय (सस्टेनेबल) दिशा देने के उद्देश्य से आज नई दिल्ली स्थित संसद भवन विस्तार (EPHA) के समिति कक्ष संख्या 3 में आवास और शहरी कार्य संबंधी स्थाई समिति की एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक आहूत की गई। इस उच्च स्तरीय बैठक में नर्मदापुरम (मध्य प्रदेश) से राज्यसभा सांसद एवं समिति की सदस्या माया नारोलिया ने सहभागिता कर नगरीय नियोजन के आधुनिकीकरण पर अपने नीतिगत विचार साझा किए। यह बैठक “जीआईएस-आधारित मास्टर प्लानिंग और नगर एवं ग्राम नियोजन संगठन (TCPO) की भूमिका और कार्यप्रणाली” विषय पर केंद्रित थी। बैठक के दौरान देश के समक्ष उत्पन्न प्रमुख शहरी चुनौतियों, जैसे—एकीकृत नियोजन ढांचे का अभाव, सिकुड़ते जल निकाय (ब्लू-ग्रीन नेटवर्क), अर्बन हीट आइलैंड का प्रभाव, जल भराव और बढ़ते प्रदूषण स्तर पर गहन चिंतन-मनन किया गया।
बैठक में अपनी बात रखते हुए सांसद माया नारोलिया ने इस बात पर विशेष बल दिया कि आगामी 20 वर्षों में अनुमानित 10 करोड़ अतिरिक्त परिवारों को नियोजित ढंग से समायोजित करना हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती और अवसर है। इसके लिए पारंपरिक मानचित्रों के स्थान पर सुदूर संवेदन (रिमोट सेंसिंग) और ड्रोन/UAV जैसी आधुनिकतम भू-स्थानिक प्रौद्योगिकियों (Geospatial Technologies) का उपयोग करके ‘जीआईएस-आधारित मास्टर प्लान’ तैयार करना एक क्रांतिकारी कदम साबित होगा। श्रीमती नारोलिया ने अमृत (AMRUT) और अमृत 2.0 योजनाओं के अंतर्गत देश के सैकड़ों शहरों में तैयार किए जा रहे जियो-डेटाबेस और मास्टर प्लान्स की प्रगति की सराहना की। उन्होंने कहा कि टाउन प्लानिंग स्कीम (TPS), लोकल एरिया प्लान (LAP) और ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) जैसे आधुनिक उपकरणों के माध्यम से हम न केवल शहरों का ढांचागत पुनर्विकास कर सकते हैं, बल्कि सार्वजनिक स्थलों को जन-साधारण, विशेषकर महिलाओं और बच्चों के लिए अधिक सुरक्षित और सुलभ बना सकते हैं।
सांसद नारोलिया ने टीसीपीओ (TCPO) द्वारा राज्यों और शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) को दिए जा रहे तकनीकी मार्गदर्शन, मॉडल बिल्डिंग बाय-लॉज और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों को और अधिक सुदृढ़ करने की आवश्यकता जताई, ताकि भारत के छोटे और मध्यम नगर भी तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से सशक्त बन सकें ।

