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भारती नारी से नारायणी’: विज्ञान भवन में गूँजा शक्ति का स्वर, सांसद माया नारोलिया ने किया राष्ट्र निर्माण का शंखनाद।

नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के पावन अवसर पर राजधानी के प्रतिष्ठित विज्ञान भवन में ‘भारती नारी से नारायणी’ विषयक एक दिवसीय राष्ट्रीय विचार संगोष्ठी का भव्य आयोजन संपन्न हुआ। भारतीय विद्वत परिषद एवं राष्ट्र सेविका समिति ‘शरण्या’ के तत्वावधान में आयोजित इस वैचारिक महाकुंभ में देश भर की प्रबुद्ध महिला विचारकों ने सहभागिता की।

कार्यक्रम के अत्यंत महत्वपूर्ण ‘अहं राष्ट्री’ सत्र को संबोधित करते हुए मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद श्रीमती माया नारोलिया ने अपने ओजस्वी विचारों से उपस्थित जनसमूह को उत्प्रेरित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय वांग्मय में नारी केवल शक्ति का प्रतीक नहीं, बल्कि राष्ट्र की चेतना का आधार है।

श्रीमती नारोलिया ने अपने उद्बोधन में निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं पर विशेष बल देते हुए अपनी बात रखी कि:-सामाजिक समरसता एवं कुटुंब प्रबोधन की दिशा में संबोधित करते हुए कहाँ की उन्होंने परिवार को समाज की प्राथमिक इकाई बताते हुए मूल्यों के संरक्षण और समरस समाज के निर्माण में महिलाओं की निर्णायक भूमिका को रेखांकित किया। पर्यावरण एवं स्वदेशी संबंधी विषय हेतु ध्यान आकर्षित करते हुए प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और ‘स्वदेशी’ को जीवन पद्धति बनाने का आह्वान करते हुए उन्होंने इसे आत्मनिर्भर भारत का मूल मंत्र बताया। नागरिक कर्तव्य को मध्य में रखकर उन्होंने कहा कि अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों के प्रति सजगता ही एक जीवंत राष्ट्र की पहचान है।

इस संगोष्ठी का मूल उद्देश्य राष्ट्र के बौद्धिक विमर्श में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना और ‘विकसित भारत’ के संकल्प में उनके योगदान को सुदृढ़ करना रहा। विभिन्न क्षेत्रों से आईं मनीषी महिलाओं ने भी समाज और राष्ट्र के सर्वांगीण उत्कर्ष हेतु अपने विचार साझा किए।

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