उत्तर कोरिया ने किया क्लस्टर बम वारहेड वाली मिसाइल का परीक्षण
1 min read
फाइल फोटो: प्योंगयांग शहर का दृश्य। चित्र साभार: Nicor / Wikimedia Commons, CC BY-SA 3.0
सार: उत्तर कोरिया ने शनिवार, 31 अक्टूबर को टैक्टिकल बैलिस्टिक मिसाइल पर लगाए जा सकने वाले क्लस्टर बम वारहेड का परीक्षण किया। उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी KCNA ने रविवार, 1 नवंबर को यह जानकारी दी। दक्षिण कोरिया की सेना ने कहा कि मिसाइल उत्तर-पश्चिमी चोंगजू इलाके से येलो सी की ओर दागी गई थी।
KCNA का दावा
समाचार एजेंसी योनहाप के अनुसार KCNA ने कहा कि यह परीक्षण उत्तर कोरिया के मिसाइल प्रशासन ने किया। इसका मकसद टैक्टिकल बैलिस्टिक मिसाइल पर लगने वाले क्लस्टर बम वारहेड की युद्ध क्षमता और ताकत को परखना था।
KCNA के मुताबिक ‘स्टैंडर्ड टाइप-2’ वारहेड अपनी सबसे अधिक घनत्व वाली क्षमता पर 12 से 13 हेक्टेयर इलाके को नष्ट कर सकता है। यह उत्तर कोरिया का अपना दावा है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
एजेंसी ने मिसाइल प्रशासन के महानिदेशक के हवाले से कहा कि ऐसे वारहेड उद्देश्य के आधार पर चार श्रेणियों में बांटे गए हैं। उनके अनुसार इसी साल के भीतर सैन्य इकाइयां लक्ष्य के हिसाब से इन सभी प्रकारों का इस्तेमाल कर सकेंगी।
दक्षिण कोरिया ने देर से दी जानकारी
दक्षिण कोरिया के जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ (JCS) ने रविवार को कहा कि अमेरिका के साथ खुफिया जानकारी साझा करते हुए लॉन्च से पहले ही गतिविधियों पर नजर रखी गई थी और सेना तैयार थी।
आम तौर पर दक्षिण कोरियाई सेना उत्तर कोरिया के बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च की जानकारी कुछ ही देर में दे देती है। इस बार सूचना परीक्षण के अगले दिन आई। दक्षिण कोरियाई मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार जापान के रक्षा मंत्रालय ने भी इस पर कोई घोषणा नहीं की।
कौन सी मिसाइल इस्तेमाल हुई
कोरिया डिफेंस एंड सिक्योरिटी फोरम के महासचिव शिन जोंग-वू के अनुसार यह मिसाइल ह्वासोंग-11 रा प्रतीत होती है। वहीं दक्षिण कोरियाई मीडिया ने सैन्य सूत्रों के हवाले से बताया कि यह एक ही कम दूरी की मिसाइल थी और दूसरे मॉडल की संभावना की भी जांच की जा रही है।
क्लस्टर बम क्या होता है
क्लस्टर बम हवा में फटकर दर्जनों से सैकड़ों छोटे बम बिखेरता है, जिससे बड़े इलाके में कई लक्ष्यों पर एक साथ हमला होता है। बिना फटे छोटे बम लंबे समय तक नागरिकों के लिए खतरा बने रह सकते हैं। इसी कारण 2008 की अंतरराष्ट्रीय क्लस्टर म्यूनिशन संधि इन पर रोक लगाती है, हालांकि उत्तर और दक्षिण कोरिया दोनों इसके सदस्य नहीं हैं।
उत्तर कोरिया ने अप्रैल में भी ह्वासोंग-11 रा मिसाइल पर क्लस्टर बम के परीक्षण का दावा किया था। KCNA के अनुसार उस परीक्षण को नेता किम जोंग उन और उनकी बेटी जू ए ने देखा था।
स्रोत: PTI/एजेंसियां व प्रमुख मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर NEWS INDIA 24×7 की मूल रिपोर्ट।



