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बांग्लादेश: गारमेंट मजदूरों के लिए वेतन बोर्ड बना, प्रदर्शन जारी

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सार: बांग्लादेश सरकार ने रविवार, 1 नवंबर को गारमेंट मजदूरों का नया न्यूनतम वेतन तय करने के लिए छह सदस्यीय वेतन बोर्ड का गठन किया। श्रम एवं रोजगार मंत्री आरिफुल हक चौधरी ने ढाका में यह घोषणा की, लेकिन 30,000 टका मासिक न्यूनतम वेतन की मांग को लेकर मजदूरों का प्रदर्शन कई औद्योगिक इलाकों में जारी रहा।

मंत्री ने मजदूरों से काम पर लौटने की अपील की

बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार श्रम मंत्री चौधरी ने स्थानीय समय के अनुसार सुबह करीब 11:30 बजे बोर्ड के गठन की घोषणा की। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने इसके लिए दो अलग-अलग अधिसूचनाएं जारी कीं। बोर्ड में मालिकों और मजदूरों के दो-दो प्रतिनिधि तथा ढाका विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर तटस्थ सदस्य के रूप में शामिल किए गए हैं।

मंत्री ने कहा कि नया बोर्ड जल्द से जल्द संशोधित वेतन ढांचा घोषित करेगा। उनके अनुसार फैक्ट्री मालिक बोर्ड का कार्यकाल पांच के बजाय तीन वर्ष रखने पर सहमत हुए हैं। मंत्री ने दावा किया कि कुछ बाहरी ताकतों ने मजदूरों को सड़कों पर उतारा हो सकता है, हालांकि उन्होंने इसका कोई ब्योरा नहीं दिया।

घोषणा के बावजूद सड़कों पर मजदूर

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार घोषणा के बाद भी हजारों मजदूरों ने प्रदर्शन किया। ढाका के मीरपुर-10 चौराहे पर जाम लगा रहे मजदूरों को हटाने के लिए पुलिस ने आंसू गैस और पानी की बौछार का इस्तेमाल किया। पुलिस के अनुसार कुछ प्रदर्शनकारियों ने पथराव भी किया।

राजधानी के बाहरी इलाके गाजीपुर में सैकड़ों मजदूरों ने एक प्रमुख हाईवे जाम किया। गाजीपुर इंडस्ट्रियल पुलिस के अधीक्षक मोहम्मद अमजद हुसैन के अनुसार प्रदर्शनों के कारण 25 से 30 फैक्ट्रियां बंद करनी पड़ीं और व्यवस्था बनाए रखने के लिए बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) के जवान तैनात किए गए।

क्या है मजदूरों की मांग

मजदूर मौजूदा 12,500 टका के बजाय 30,000 टका (करीब 245 डॉलर) मासिक न्यूनतम वेतन की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि भोजन, किराया, परिवहन और इलाज का खर्च तेजी से बढ़ा है। यह आंदोलन अक्टूबर के मध्य में उत्तरा से शुरू होकर मीरपुर, आशुलिया और गाजीपुर तक फैल गया।

अर्थव्यवस्था के लिए क्यों अहम

रॉयटर्स के अनुसार बांग्लादेश का गारमेंट उद्योग करीब 40 लाख लोगों को रोजगार देता है और देश की निर्यात कमाई में इसकी हिस्सेदारी 80% से अधिक है। यह उद्योग कई बड़े पश्चिमी ब्रांडों को कपड़े की आपूर्ति करता है, इसलिए लंबे आंदोलन से उत्पादन और निर्यात पर असर की आशंका जताई जा रही है।

स्रोत: PTI/एजेंसियां व प्रमुख मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर NEWS INDIA 24×7 की मूल रिपोर्ट।

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