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‘रोजा’ और ‘अन्नियन’ फेम दिग्गज अभिनेत्री वत्सला राजगोपाल का 93 साल की उम्र में निधन; 60 की उम्र में मणिरत्नम की फिल्म से किया था डेब्यू, 400 से ज्यादा फिल्मों में किया काम

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प्रतीकात्मक फोटो: AVM स्टूडियोज, चेन्नई। चित्र साभार: Melanie M / Wikimedia Commons, CC BY 2.0

प्रतीकात्मक फोटो: AVM स्टूडियोज, चेन्नई। चित्र साभार: Melanie M / Wikimedia Commons, CC BY 2.0

सार: तमिल सिनेमा और टीवी की जानी-मानी अभिनेत्री वत्सला राजगोपाल का शुक्रवार, 30 अक्टूबर को चेन्नई में निधन हो गया। वे 93 साल की थीं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनका निधन उम्र संबंधी बीमारियों के कारण हुआ। मणिरत्नम की ‘रोजा’ से करीब 60 साल की उम्र में फिल्मी सफर शुरू करने वाली वत्सला ने 400 से ज्यादा फिल्मों में काम किया। उनका पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए चेन्नई के पल्लावरम स्थित आवास पर रखा गया है।

क्लर्क की नौकरी से थिएटर तक

वत्सला राजगोपाल का जन्म तिरुवनंतपुरम में हुआ था। स्कूल के दिनों से ही उन्हें नृत्य और नाटक में रुचि थी। 1953 में शादी के बाद वे चेन्नई आ गईं और महालेखाकार (अकाउंटेंट जनरल) कार्यालय में क्लर्क की नौकरी करने लगीं। दिलचस्प बात यह है कि बाद में तमिल सिनेमा के दिग्गज फिल्मकार बने के. बालचंदर उसी दफ्तर में वरिष्ठ अधिकारी थे।

अभिनय का शौक उन्हें कार्टूनिस्ट श्रीधरन के थिएटर ग्रुप ‘रसिक रंगा’ तक ले गया। मंच पर उनके अभिनय ने मणिरत्नम का ध्यान खींचा।

‘रोजा’ से मिली नई पहचान

1992 में आई मणिरत्नम की ‘रोजा’ में उन्होंने अभिनेत्री मधु की दादी का किरदार निभाया। अरविंद स्वामी और मधु स्टारर यह फिल्म देशभर में सुपरहिट रही और इसी के साथ करीब 60 साल की उम्र में वत्सला का फिल्मी करियर शुरू हुआ।

400 से ज्यादा फिल्मों का सफर

देर से शुरुआत के बावजूद वत्सला तमिल सिनेमा का जाना-पहचाना चेहरा बन गईं। स्नेहभरी और कभी-कभी हास्य से भरपूर दादी-नानी के किरदारों में दर्शकों ने उन्हें खूब पसंद किया। उनकी चर्चित फिल्मों में शामिल हैं:

  • ‘सती लीलावती’ (अंबुजम मामी का किरदार)
  • ‘अन्नियन’ और ‘मोझी’
  • ‘रिदम’, ‘विनर’, ‘पट्टियल’ और ‘धाम धूम’
  • ‘कल्याण समायल सादम’

टीवी पर भी रहीं लोकप्रिय

फिल्मों के अलावा वत्सला छोटे पर्दे पर भी बेहद लोकप्रिय रहीं। उन्होंने ‘चित्ती’, ‘आनंदम’, ‘मुंधानई मुडिचु’ और ‘वसंतम’ जैसे चर्चित धारावाहिकों में काम किया। मशहूर फिल्मकार बालू महेंद्र की टीवी एंथोलॉजी ‘कथई नेरम’ में भी वे नजर आईं।

एक प्रेरक सफर

वत्सला राजगोपाल का जीवन इस बात की मिसाल है कि सपनों को पूरा करने की कोई उम्र नहीं होती। थिएटर, टीवी और सिनेमा में दशकों तक सक्रिय रहीं वत्सला के निधन पर तमिल फिल्म जगत और उनके प्रशंसकों में शोक की लहर है।

स्रोत: PTI/एजेंसियां व प्रमुख मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर NEWS INDIA 24×7 की मूल रिपोर्ट।

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