एमपी में छुट्टी के दिन भी खुलेंगी मंडियां: सोयाबीन-मक्का किसानों के लिए मोहन सरकार का बड़ा फैसला, त्योहारों में भी जारी रहेगी खरीदी
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प्रतीकात्मक फाइल फोटो: सोयाबीन की कटाई। चित्र साभार: Valisport24 / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0
सार: मध्य प्रदेश में अब छुट्टी के दिन भी खुलेंगी मंडियां। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर राज्य सरकार ने फैसला किया है कि सोयाबीन और मक्का की खरीदी अवकाश के दिनों में भी जारी रहेगी, ताकि त्योहारों और साप्ताहिक छुट्टियों के कारण किसानों को उपज बेचने के लिए इंतजार न करना पड़े। मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी दी और इसके बाद मंडी बोर्ड की ओर से आदेश भी जारी कर दिया गया।
क्या है नया आदेश
आदेश के मुताबिक प्रदेश की कृषि उपज मंडियों और उप-मंडी परिसरों में अवकाश के दिनों में भी सोयाबीन और मक्का की बिक्री व्यवस्था जारी रहेगी। मंडी बोर्ड के संयुक्त संचालक लाइसेंसधारी व्यापारियों से समन्वय कर यह सुनिश्चित करेंगे कि छुट्टियों में भी नीलामी और खरीदी का काम न रुके। तौल, नीलामी और भुगतान की व्यवस्था स्थानीय मंडी प्रबंधन के निर्देशों के अनुसार चलेगी।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि सोयाबीन और मक्का उत्पादक किसानों की सुविधा और उपज की सुगम खरीदी के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने किसानों के हितों की रक्षा और उनकी मेहनत का सही दाम दिलाने को सरकार की प्राथमिकता बताया।
किसानों को क्यों थी परेशानी
अक्टूबर-नवंबर में खरीफ फसलों की कटाई के बाद मंडियों में भारी आवक होती है। इसी दौरान दिवाली समेत कई त्योहारों और साप्ताहिक अवकाश के चलते मंडियां लगातार कई दिन बंद रहती थीं। ऐसे में दूर-दराज के गांवों से ट्रैक्टर-ट्रॉली में उपज लेकर पहुंचे किसानों को कई बार दिनों तक इंतजार करना पड़ता था, जिससे भाड़ा और समय दोनों का नुकसान होता था। नई व्यवस्था से एक ही दिन में अत्यधिक आवक का दबाव भी कम होने की उम्मीद है।
इस साल ज्यादा उत्पादन का अनुमान
मध्य प्रदेश देश के सबसे बड़े सोयाबीन उत्पादक राज्यों में शामिल है। मालवा और निमाड़ समेत कई इलाकों में बड़ी संख्या में किसान इस फसल पर निर्भर हैं, जबकि कई जिलों में मक्का की खेती भी बड़े पैमाने पर होती है। सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SOPA) के खरीफ 2026 के अनुमान के अनुसार प्रदेश में सोयाबीन उत्पादन करीब 57.16 लाख टन तक पहुंच सकता है, जो पिछले साल के लगभग 43.24 लाख टन से करीब 32 प्रतिशत ज्यादा है। ज्यादा उत्पादन का मतलब है मंडियों में ज्यादा आवक, इसलिए खरीदी व्यवस्था का लगातार चलना जरूरी माना जा रहा है।
भावांतर योजना से भी जुड़ा फैसला
राज्य सरकार ने सोयाबीन किसानों के लिए भावांतर भुगतान योजना भी लागू की है, जिसके तहत तय नियमों के अनुसार बाजार भाव और संदर्भ मूल्य के अंतर की भरपाई की जाती है। खरीफ 2026 के लिए अधिसूचित मंडियों में सोयाबीन बिक्री की अवधि 22 अक्टूबर 2026 से 15 जनवरी 2027 तक तय है। छुट्टियों में भी मंडियां खुलने से किसानों को इस अवधि में उपज बेचने के ज्यादा दिन मिलेंगे।
किसानों के लिए सलाह
- मंडी जाने से पहले अपनी नजदीकी मंडी में अवकाश के दिन की व्यवस्था की पुष्टि कर लें।
- भावांतर योजना का लाभ पंजीकरण और पात्रता शर्तों के अनुसार ही मिलेगा, इसलिए जरूरी दस्तावेज साथ रखें।
स्रोत: PTI/एजेंसियां व प्रमुख मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर NEWS INDIA 24×7 की मूल रिपोर्ट।
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