गिग वर्कर्स के लिए बड़ी खबर: केंद्र ने गठित किए नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड, डिलीवरी-कैब ड्राइवरों और असंगठित कामगारों के लिए बनेंगी नई कल्याण योजनाएं
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फाइल फोटो: मनसुख मांडविया। चित्र साभार: Dhruvdube / Wikimedia Commons, CC0
सार: फूड डिलीवरी, कैब और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जुड़े लाखों गिग वर्कर्स और असंगठित क्षेत्र के कामगारों के लिए केंद्र सरकार ने शुक्रवार को अहम कदम उठाया। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने असंगठित कामगारों और गिग व प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए दो अलग-अलग नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड गठित कर दिए हैं। केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया दोनों बोर्ड के अध्यक्ष होंगे।
कौन-कौन होगा बोर्ड में
दोनों बोर्ड में केंद्र और राज्य सरकारों के प्रतिनिधि, प्रमुख एग्रीगेटर कंपनियां, नियोक्ता, सिविल सोसाइटी संगठन, मजदूर यूनियनें और गिग व प्लेटफॉर्म वर्कर्स के संगठन शामिल होंगे। यानी पहली बार कामगारों, कंपनियों और सरकार को एक ही मंच पर लाकर नीतियां तय करने का ढांचा बनाया गया है।
बोर्ड क्या काम करेंगे
- असंगठित, गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के अलग-अलग वर्गों के लिए उपयुक्त कल्याण योजनाओं की सिफारिश करना।
- सामाजिक सुरक्षा संहिता (सोशल सिक्योरिटी कोड) के अमल पर केंद्र सरकार को सलाह देना।
- इन कामगारों के लिए चल रही योजनाओं की निगरानी करना।
- राज्य स्तर पर रिकॉर्ड रखने के काम की समीक्षा करना।
- फंड और खातों से होने वाले खर्च की समीक्षा करना।
बोर्ड की साल में कम से कम तीन बैठकें होंगी और इनकी कार्यप्रणाली के नियम केंद्र सरकार तय करेगी।
गिग वर्कर्स के लिए क्यों अहम
गिग वर्कर्स वे लोग हैं जो पारंपरिक नौकरी के बजाय काम या ऑर्डर के हिसाब से कमाई करते हैं, जैसे डिलीवरी पार्टनर, ऐप आधारित कैब ड्राइवर और फ्रीलांसर। इनमें से ज्यादातर के पास पीएफ, बीमा, पेंशन या स्वास्थ्य सुरक्षा जैसी सुविधाएं नहीं होतीं। रिपोर्ट्स बताती हैं कि देश के गिग वर्कर्स का बड़ा हिस्सा अब भी सरकारी योजनाओं के दायरे से बाहर है। ऐसे में यह बोर्ड उनके लिए लक्षित योजनाएं बनाने का रास्ता खोल सकता है।
सोशल सिक्योरिटी कोड से जुड़ा कदम
सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 में पहली बार गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को कानूनी रूप से परिभाषित किया गया था और उनके लिए राष्ट्रीय स्तर पर बोर्ड बनाने का प्रावधान किया गया था। अब बोर्ड गठित होने से इस कानून के तहत योजनाएं बनाने और लागू करने की प्रक्रिया को गति मिलने की उम्मीद है।
आगे क्या
अब नजर इस पर रहेगी कि बोर्ड की पहली बैठक कब होती है और गिग वर्कर्स के लिए बीमा, स्वास्थ्य और पेंशन जैसी कौन-सी योजनाएं सबसे पहले सामने आती हैं। कामगार संगठनों की लंबे समय से मांग रही है कि प्लेटफॉर्म कंपनियों की जवाबदेही तय हो और कामगारों को न्यूनतम सामाजिक सुरक्षा मिले।
स्रोत: PTI/एजेंसियां व प्रमुख मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर NEWS INDIA 24×7 की मूल रिपोर्ट।
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