केरल SIR पर सुप्रीम कोर्ट: डेडलाइन बढ़ाने से इनकार, छूटे मतदाताओं के लिए रास्ता खुला; चुनाव आयोग को प्रतिवेदनों की जांच कर रिपोर्ट देने का निर्देश
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चित्र साभार: Pinakpani / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0 (फाइल फोटो)
सार: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केरल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की समयसीमा बढ़ाने से इनकार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि मतदाता सूची में सुधार और नाम जुड़वाने की प्रक्रिया लगातार चलती रहती है, इसलिए डेडलाइन बढ़ाने की जरूरत नहीं है। हालांकि कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को उन लोगों का ब्योरा देने की छूट दी, जो समय पर गणना फॉर्म नहीं भर सके। चुनाव आयोग ऐसे प्रतिवेदनों की जांच कर कोर्ट को रिपोर्ट देगा।
कोर्ट में क्या हुआ
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ कई राज्यों में चल रहे SIR को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ताओं के वकील ने दलील दी कि समय की कमी के कारण कई लोग गणना प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाए, इसलिए केरल में डेडलाइन बढ़ाई जाए। उन्होंने यह भी कहा कि सत्यापन का काम शुक्रवार को ही खत्म होना है।
CJI ने क्या कहा
CJI सूर्यकांत ने कहा कि याचिकाकर्ता जहां भी महसूस करें कि किसी व्यक्ति को मौका मिलना चाहिए, उसकी जानकारी प्रतिवेदन के रूप में आयोग के संज्ञान में लाएं। कोर्ट आयोग से उसकी जांच करने को कहेगा और मामला लंबित रखेगा। उन्होंने टिप्पणी की कि यह एक निरंतर प्रक्रिया है, इसलिए समय बढ़ाने की आवश्यकता नहीं है।
चुनाव आयोग का पक्ष
चुनाव आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता डी.एस. नायडू ने कहा कि पुनरीक्षण का काम पूरा हो चुका है और जिन लोगों के नाम छूट गए हैं, वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत सुधार के लिए संबंधित अधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं।
आदेश की मुख्य बातें
- केरल में SIR की डेडलाइन नहीं बढ़ेगी।
- याचिकाकर्ता उन लोगों का ब्योरा दे सकेंगे, जो तय अवधि में गणना फॉर्म जमा नहीं कर पाए।
- चुनाव आयोग इन प्रतिवेदनों की जांच कर कोर्ट को रिपोर्ट सौंपेगा।
- बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने के आरोपों पर आयोग को 4 हफ्ते में जवाब देना होगा।
आम मतदाता के लिए इसका मतलब
जिन लोगों का नाम SIR के दौरान छूट गया है, उनके लिए रास्ता पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। वे नाम जुड़वाने या सुधार के लिए तय फॉर्म और प्रक्रिया के जरिए बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) या निर्वाचन अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं। साथ ही याचिकाकर्ताओं के जरिए दिए गए प्रतिवेदनों पर भी आयोग को विचार करना होगा।
SIR पर देशभर में बहस
SIR को लेकर विपक्ष लगातार चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहा है। हाल ही में आयोग ने दिल्ली समेत कुछ राज्यों में दावे-आपत्तियों की समयसीमा बढ़ाई है, जबकि INDIA गठबंधन 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में रैली की तैयारी में है। ऐसे में केरल पर सुप्रीम कोर्ट का यह रुख आने वाले दिनों में SIR से जुड़ी दूसरी याचिकाओं के लिए भी अहम माना जा रहा है।
स्रोत: PTI/एजेंसियां व प्रमुख मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर NEWS INDIA 24×7 की मूल रिपोर्ट।
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