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आरक्षित सीटों का रोटेशन संसद तय करे: सुप्रीम कोर्ट

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सार: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार, 4 नवंबर 2026 को लोकसभा और विधानसभाओं में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित सीटों के अनिवार्य रोटेशन की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। PTI के अनुसार अदालत ने कहा कि यह फैसला विधायिका के दायरे में है और अदालतें इसका आदेश नहीं दे सकतीं।

आरक्षित सीटों का रोटेशन: अदालत ने क्या कहा

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले में दखल से इनकार किया। हाईकोर्ट ने परिसीमन अधिनियम, 2002 की धारा 9(1)(c) को वैध ठहराया था।

कानूनी पोर्टल्स के अनुसार पीठ ने अपने आदेश में कहा कि हाईकोर्ट ने माना था कि आदर्श रूप से रोटेशन होना चाहिए, लेकिन अदालत इसका निर्देश नहीं दे सकती और यह संसद के दायरे का विषय है। पीठ ने कहा, “हमें अलग राय रखने का कोई आधार नहीं दिखता।” (अंग्रेजी आदेश का हिंदी अनुवाद)

धारा 9(1)(c) क्या कहती है

यह प्रावधान कहता है कि आरक्षित निर्वाचन क्षेत्र उन इलाकों में तय किए जाएं, जहां SC/ST आबादी का अनुपात अपेक्षाकृत ज्यादा हो। इसमें समय-समय पर रोटेशन की कोई व्यवस्था नहीं है।

याचिकाकर्ता की दलील

याचिका उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले की 191-कादीपुर विधानसभा सीट के मतदाता जगदीश सिंह ने दायर की थी। उनका कहना था कि यह सीट करीब सात दशक से SC के लिए आरक्षित है। उन्होंने पंचायतों और नगर निकायों (अनुच्छेद 243D और 243T) जैसी रोटेशन व्यवस्था की मांग की थी।

याचिका में कहा गया था कि रोटेशन न होने से संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 19 का उल्लंघन होता है। याचिकाकर्ता के अनुसार मौजूदा व्यवस्था से कुछ ही राजनीतिक परिवारों को फायदा मिलता है।

जनप्रतिनिधियों के पास जाने की छूट

अदालत ने याचिकाकर्ता को जनप्रतिनिधियों के पास जाकर रोटेशन के पक्ष में सहमति बनाने की छूट दी। सुनवाई के दौरान पीठ ने मौखिक टिप्पणी में कहा कि याचिकाकर्ता गलत मंच पर आए हैं। यह टिप्पणी आदेश का हिस्सा नहीं है।

आगे क्या

संविधान के अनुच्छेद 330 और 332 लोकसभा और विधानसभाओं में SC/ST सीटों के आरक्षण का प्रावधान करते हैं। रोटेशन जैसी व्यवस्था लाने के लिए संसद को कानून में बदलाव करना होगा।

स्रोत: PTI/एजेंसियां व प्रमुख मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर NEWS INDIA 24×7 की मूल रिपोर्ट।

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