सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, क्षेत्रीय कार्यालय होशंगाबाद में संस्थापक दिवस का भव्य आयोजन

सोराबजी का दृष्टिकोण बैंकिंग सेवा के साथ सामाजिक दायित्व निभाना और आर्थिक स्वतंत्रता को बढ़ावा देना भी था
नर्मदापुरम। सेंट्रल बैंक आफ इंडिया क्षेत्रीय कार्यालय में बैंक के संस्थापक सर सोराबजी पोचाखानावाला की 144वीं जयंती संस्थापक दिवस के रूप में उत्साह के साथ मनाई गई। इस अवसर पर क्षेत्रीय कार्यालय में कार्यक्रम आयोजित किया गया। बैंककर्मियों, ग्राहकों एवं स्थानीय नागरिकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम का शुभारंभ संस्थापक महोदय के चित्र पर माल्यार्पण, पुष्पांजलि एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इसके उपरांत सभी ने मिलकर केक काटा और मिठाई वितरण कर इस विशेष दिन का आनंद साझा किया।
अपने प्रेरणादायी संबोधन में क्षेत्रीय प्रमुख महोदय ने सर सोराबजी पोचाखानावाला के जीवन, संघर्ष और उपलब्धियों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार वर्ष 1911 में सर सोराबजी ने भारतीयों के आर्थिक सशक्तिकरण के उद्देश्य से देश का पहला पूर्णत: स्वदेशी वाणिज्यिक बैंक स्थापित किया। उनका दृष्टिकोण केवल बैंकिंग सेवा देना ही नहीं था, बल्कि सामाजिक दायित्व निभाना, आर्थिक स्वतंत्रता को बढ़ावा देना और ग्राहकों के विश्वास को सर्वोपरि रखना भी था। उन्होंने कहा कि सर सोराबजी के सिद्धांत – ईमानदारी, पारदर्शिता, ग्राहक-केन्द्रित सेवा और नवाचार आज भी बैंक के संचालन के लिए प्रेरणास्रोत हैं। क्षेत्रीय प्रमुख ने सभी कर्मचारियों से आग्रह किया कि वे इन मूल्यों को अपने कार्य में अपनाएं और बैंक के विकास में सतत योगदान दें। इस अवसर पर एक बैंकिंग एवं सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता में क्षेत्रीय कार्यालय के कार्मिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।प्रतियोगिता के दौरान प्रतिभागियों से बैंकिंग, वित्तीय जागरूकता एवं सामान्य ज्ञान से संबंधित प्रश्न पूछे गए। प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य कर्मचारियों को बैंक के नवीन कैम्पेन, उत्पादों और सेवाओं के बारे में अद्यतन जानकारी देना तथा उनकी कार्यकुशलता एवं जागरूकता को बढ़ाना था। अंत में कर्मचारियों ने संस्थापक के आदर्शों से प्रेरित होकर सेवा गुणवत्ता में सुधार, डिजिटल बैंकिंग को बढ़ावा देने तथा समाजोपयोगी कार्यों में सक्रिय भागीदारी का संकल्प लिया। संस्थापक दिवस का यह आयोजन न केवल बैंक के गौरवशाली इतिहास को पुनः जीवंत करता है, बल्कि कर्मचारियों और ग्राहकों के बीच आपसी विश्वास एवं सहयोग की भावना को और भी मजबूत बनाता है।