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100 वर्ष पुराने प्राचीन मंदिर में भगवान चित्रगुप्त का प्रकटोत्सव मनाया जाएगा

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नर्मदापुरम। न्याय, ज्ञान और लेखनी के अधिष्ठाता एवं कायस्थ समाज के आराध्य देव भगवान श्री चित्रगुप्त जी का प्रकटोत्सव इस वर्ष 23 अप्रैल 2026, गुरुवार को अत्यंत हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। कोरीघाट स्थित भगवान चित्रगुप्त का यह पावन धाम अपनी भव्य वास्तुकला और ऐतिहासिकता के लिए विख्यात है। 100 वर्ष से अधिक पुराना होने के कारण यह पूरे संभाग का सबसे प्राचीन और एकमात्र चित्रगुप्त मंदिर है, जहाँ मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक पूजन करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

मातृशक्ति का नेतृत्व और भव्य शोभायात्रा

इस वर्ष के आयोजन की सबसे गौरवशाली विशेषता यह है कि इसका संपूर्ण नेतृत्व और प्रबंधन मातृशक्ति द्वारा किया जा रहा है। आयोजन समिति की सदस्य मंजू वर्मा, ज्योति वर्मा, सुमन वर्मा और प्रीति खरे की देखरेख में मंदिर की विशेष साज-सज्जा और व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

प्रतिवर्ष की परंपरा को निभाते हुए दोपहर 4:00 बजे से भगवान श्री चित्रगुप्त जी की एक विशाल शोभायात्रा निकाली जाएगी। यह यात्रा मंदिर परिसर से प्रारंभ होकर शहर के मुख्य मार्गों और चौराहों से भ्रमण करेगी, जिसमें बड़ी संख्या में चित्रांश बंधु और श्रद्धालु शामिल होंगे।

उत्सव का कार्यक्रम: पूजन से लेकर महाआरती तक

कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः काल मंदिर में विधि-विधान से पूजन-अर्चन, महाआरती और दीप प्रज्ज्वलन के साथ होगा। इसके पश्चात श्रद्धालुओं के बीच विशेष प्रसाद का वितरण किया जाएगा। आयोजन को लेकर समाज के युवाओं और महिलाओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है।

दिग्गज राजनेताओं की गरिमामयी उपस्थिति

इस पावन अवसर पर क्षेत्र के प्रमुख जनप्रतिनिधि और समाजसेवी भगवान का आशीर्वाद लेने पहुँचेंगे। कार्यक्रम में मुख्य रूप से शामिल होने वाले अतिथियों में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एवं विधायक डॉ.सीतासरन शर्मा, शहर के आचार्य सोमेश परसाई, पूर्व विधायक गिरिजा शंकर शर्मा लोकसभा सांसद दर्शन सिंह चौधरी, राज्य सभा सांसद श्रीमती माया नारोलिया, नगरपालिका अध्यक्षश्रीमती नीतू यादव,पीयूष शर्मा आदि दिग्गज उपस्थिति रहेंगे ।

समाज की भावभीनी अपील

आयोजक मंडल और समस्त कायस्थ समाज ने सभी चित्रांश बंधुओं और धर्मप्रेमी जनता से आग्रह किया है कि वे इस ऐतिहासिक प्रकटोत्सव में सपरिवार उपस्थित होकर पुण्य लाभ प्राप्त करें। पदाधिकारियों के अनुसार, यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि समाज की एकता और गौरवशाली परंपरा का जीवंत उदाहरण भी है।

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