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सच दिखता है

अमेरिका-ईरान डील के लिए कतर की नई कोशिश: मध्यस्थ फिर पहुंचे तेहरान, ईरान बोला- शांति प्रस्ताव मंजूर नहीं; परमाणु मुद्दे और नाकेबंदी पर अटकी बात

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फाइल फोटो: तेहरान। चित्र साभार: Blondinrikard Fröberg / Wikimedia Commons, CC BY 2.0

फाइल फोटो: तेहरान। चित्र साभार: Blondinrikard Fröberg / Wikimedia Commons, CC BY 2.0

सार: पश्चिम एशिया में जारी युद्ध को खत्म करने के लिए कूटनीतिक कोशिशें फिर तेज हो गई हैं। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, कतर के मध्यस्थ शुक्रवार को एक बार फिर तेहरान पहुंचे, ताकि अमेरिका और ईरान के बीच समझौते का रास्ता निकाला जा सके। बातचीत से जुड़े एक अधिकारी के अनुसार, यह मध्यस्थता अमेरिका के साथ तालमेल में हो रही है।

कतर का शांति मसौदा और ईरान का इनकार

सूत्रों के मुताबिक, कतर ने रविवार को ईरान के सामने शांति समझौते का एक मसौदा रखा था। लेकिन एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने इन प्रस्तावों को अस्वीकार्य बताते हुए कहा कि तेहरान अपने परमाणु रुख पर कायम रहेगा। इसके बावजूद कतर के मध्यस्थों का दोबारा तेहरान जाना दिखाता है कि बातचीत के दरवाजे अभी बंद नहीं हुए हैं।

कहां फंसा है पेच

दोनों पक्षों की शर्तें फिलहाल एक-दूसरे से उलट हैं:

  • अमेरिका चाहता है कि वार्ता की शुरुआत से ही परमाणु कार्यक्रम का मुद्दा एजेंडे में शामिल हो।
  • ईरान की मांग है कि पहले अमेरिका बंदरगाहों की नाकेबंदी खत्म करे और तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंध हटाए।

अराघची का सात दिन वाला प्रस्ताव

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बुधवार को कहा था कि तेहरान मध्यस्थों के लगातार संपर्क में है। उनके मुताबिक, ईरान उन विचारों पर गौर कर रहा है, जिनसे पश्चिम एशिया में युद्ध खत्म करने के लिए उसके अपने सात दिवसीय प्रस्ताव को लागू किया जा सके।

ट्रंप का बयान

इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को कहा कि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की ईरान से हुई पहल का संबंध मेडिकल सप्लाई से था। अमेरिकी मीडिया में इस पहल को शांति वार्ता दोबारा शुरू करने की कोशिश से जोड़कर देखा जा रहा था।

भारत के लिए क्यों अहम

ईरान युद्ध का असर कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक सप्लाई पर साफ दिख रहा है। ऐसे में अमेरिका-ईरान के बीच कोई भी समझौता तेल बाजार, खाड़ी देशों में रह रहे भारतीयों और भारत के ऊर्जा आयात के लिहाज से बेहद अहम होगा। फिलहाल दोनों पक्षों की कड़ी शर्तों को देखते हुए जल्द किसी बड़े समझौते के संकेत नहीं हैं, लेकिन कतर की सक्रियता ने उम्मीद जरूर जगाई है।

स्रोत: PTI/एजेंसियां व प्रमुख मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर NEWS INDIA 24×7 की मूल रिपोर्ट।

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