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जल जीवन मिशन की सफलता के लिए सांसद माया नारोलिया की पहल, मध्य प्रदेश के गांवों में जल आपूर्ति की जमीनी हकीकत पर मांगी जानकारी

नई दिल्ली। राज्यसभा में सांसद श्रीमती माया नारोलिया ने मध्य प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यात्मक घरेलू नल कनेक्शन (एफएचटीसी) की कार्यशीलता, जल गुणवत्ता और अनियमित जल आपूर्ति की निरंतर सुनिश्चित होगी ।

राज्यसभा सांसद माया नारोलिया ने जल शक्ति मंत्रालय से जानना चाहा कि क्या ग्रामीण क्षेत्रों में नल कनेक्शन की स्थिति और जल आपूर्ति की अनियमितता के आकलन के लिए किसी स्वतंत्र गुणवत्ता अथवा तृतीय पक्ष निरीक्षण का आयोजन किया गया है।
सांसद माया नारोलिया ने विशेष रूप से गैर-कार्यात्मक और आंशिक रूप से कार्यशील घरेलू नल कनेक्शन से जुड़ी समस्याओं की ओर ध्यान दिलाते हुए उनके निरीक्षण के निष्कर्षों की जानकारी मांगी।

इस पर जवाब देते हुए केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने कहा कि योजना का डीपीआर बनाना, टेंडरिंग, क्रियान्वयन और रख-रखाव पूरी तरह राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। केंद्र सरकार की ओर से योजनाओं को 15 दिन तक सुचारु रूप से चलाने के बाद ग्राम पंचायतों को हैंडओवर किया जाता है। उन्होंने बताया कि जल आपूर्ति की निगरानी और गुणवत्ता जांच की व्यवस्था ग्राम पंचायत स्तर पर की जानी चाहिए, इसके लिए राज्यों को बार-बार निर्देश दिए गए हैं।
मंत्री पाटिल ने सदन को बताया कि देशभर में जल गुणवत्ता की जांच के लिए 2868 प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं, जहां राज्य और केंद्र सरकार के अधिकारी संयुक्त निरीक्षण कर पानी की गुणवत्ता की जांच करते हैं। जहां भी शिकायतें प्राप्त होती हैं, उन्हें दूर करने का प्रयास किया जाता है।

इसके बाद सांसद माया नारोलिया ने पूरक प्रश्न के माध्यम से यह जानना चाहा कि क्या मध्य प्रदेश के जिलों से जल गुणवत्ता अथवा अनियमित जल आपूर्ति से संबंधित कोई शिकायत प्राप्त हुई है और कार्यात्मक घरेलू नल कनेक्शन की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए क्या सुधारात्मक कदम उठाए गए हैं।

मंत्री सी.आर. पाटिल ने बताया कि अब तक देश के विभिन्न हिस्सों से 17,024 शिकायतें प्राप्त हुई हैं। इन शिकायतों के निवारण के लिए केंद्र सरकार ने 119 टीमें भेजकर मौके पर जांच कराई है और संबंधित राज्यों से रिपोर्ट भी मंगवाई गई है। उन्होंने कहा कि जल गुणवत्ता से जुड़ी शिकायतें अपेक्षाकृत कम आई हैं, लेकिन जहां भी ऐसी शिकायतें मिली हैं, वहां राज्य सरकारों को मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री स्तर पर पत्र लिखकर त्वरित समाधान के निर्देश दिए गए हैं।

 

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