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गुरुकुल संस्कार शाला के माध्यम से वैचारिक परिवर्तन का प्रयास -डॉ अखिलेश खंडेलवाल

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25 जिलों में 26,125 से अधिक सेवादार जुड़े, छह माह में 125 से अधिक संस्कारशालाओं का विस्तार; अब 200 सक्रिय संस्कारशालाओं का लक्ष्य

नर्मदापुरम । समाज में सेवा, संस्कार और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करने के उद्देश्य से गुरुकुल भोपाल द्वारा संचालित संस्कार शाला अभियान प्रदेश में निरंतर विस्तार कर रहा है। पिछले छह महीनों में प्रदेश के 25 जिलों में 26,125 से अधिक सेवादार इस अभियान से जुड़ चुके हैं। वहीं, 125 से अधिक संस्कारशालाओं का नेटवर्क विकसित हुआ है तथा 100 से अधिक प्रशिक्षु आचार्य स्थानीय स्तर पर नेतृत्व की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। अब संस्था ने 200 सक्रिय संस्कारशालाएं विकसित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। गुरुकुल भोपाल की सितंबर माह की प्रगति रिपोर्ट में अभियान की इन उपलब्धियों का उल्लेख किया गया है।

गुरुकुल भोपाल की राष्ट्रीय मूल्य संवर्धन योजना के कार्यकारी अध्यक्ष एवं राज्य समन्वय समिति सदस्य डॉ. अखिलेश खंडेलवाल ने बताया कि संस्कारशाला अभियान का उद्देश्य बच्चों और युवाओं में सकारात्मक वैचारिक परिवर्तन लाना तथा उन्हें सेवा और सामाजिक दायित्वों से जोड़ना है।

उन्होंने कहा कि संस्कारशालाओं की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि बड़े भवनों और महंगे संसाधनों के बिना भी बच्चों तक संस्कारों और सेवा की भावना पहुंचाई जा सकती है। व्हाट्सएप एवं स्थानीय समूहों के माध्यम से बच्चों के साथ नियमित संवाद स्थापित कर उन्हें सेवा संबंधी गतिविधियों के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

डॉ. खंडेलवाल ने बताया कि आगामी योजना में प्रत्येक जिले में स्थानीय प्रशिक्षु आचार्य तैयार करना और सेवा समूहों को निरंतर सक्रिय बनाए रखना प्राथमिकता है। संस्था का लक्ष्य प्रत्येक जिले में सेवा एवं सामाजिक उत्तरदायित्व से जुड़े सक्रिय समूह विकसित करना है।

25 जिलों में संचालित हो रही गतिविधियां

गुरुकुल संस्कार शाला अभियान के अंतर्गत भोपाल, विदिशा, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, गुना, अशोकनगर, सागर, दमोह, पन्ना, सतना, मैहर, रीवा, सिंगरौली, शहडोल, डिंडोरी, मंडला, सिवनी, छिंदवाड़ा, नरसिंहपुर, हरदा, शुजालपुर, खंडवा एवं नर्मदापुरम सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों में गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।

अभियान के अंतर्गत वृद्ध सेवा, बाल सहयोग, पशु सेवा, पक्षी सेवा एवं पर्यावरण सेवा को प्रमुखता दी जा रही है। इन गतिविधियों के माध्यम से बच्चों में संवेदनशीलता, सहयोग, अनुशासन और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।

प्रशिक्षण और संगठनात्मक विस्तार पर जोर

गुरुकुल प्रमुख परेश पाठक ने बताया कि प्रदेश में विभिन्न शैक्षणिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्थाओं के माध्यम से वैचारिक विकास और संस्कार निर्माण के लिए यह अभियान संचालित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य समाज में सकारात्मक विचारों का प्रसार करते हुए सेवा भाव से जुड़े कार्यकर्ताओं की एक मजबूत श्रृंखला तैयार करना है।

राज्य समन्वय समिति सदस्य रवि सोनी एवं डॉ. राजकुमार मालवीय द्वारा लगातार प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में प्रवास कर संस्कारशाला विकास के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। प्रशिक्षु आचार्यों को स्थानीय स्तर पर संस्कारशालाओं के संचालन और सेवा गतिविधियों के विस्तार के लिए तैयार किया जा रहा है।

गुरुकुल भोपाल का यह अभियान कम संसाधनों में व्यापक सामाजिक परिवर्तन की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास बन रहा है। आगामी समय में 200 सक्रिय संस्कारशालाओं का लक्ष्य प्राप्त कर प्रत्येक समूह में 100 से अधिक सदस्यों को जोड़ने की योजना है, जिससे सेवा, संस्कार और सामाजिक समरसता का संदेश प्रदेश के अधिकाधिक परिवारों तक पहुंच सके।

 

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