सुलझी अर्चना मिसिंग की गुत्थी, लेकिन कई सवाल अब भी बरकरार

कटनी से जिला ब्यूरो आदेश खरया
कटनी। पिछले करीब 2 सप्ताह से समूचे देश में खलबली मचाने वाले अर्चना मिसिंग केस की गुत्थी तो रेल पुलिस ने सुलझा ली है, लेकिन अब भी कई सवाल निरुत्तर बने हुए हैं। जिनके जवाब या तो रेल पुलिस के पास नहीं हैं या रेल पुलिस इन्हे जानबूझकर तलाशना नहीं चाहती। खैर रहस्यमय ढंग से लापता हुई कानून की जानकर अर्चना तिवारी की मुंह जुबानी कहानी पर यकीन करें तो परिजनों द्वारा बने शादी के दवाब से बचने और अपनी पढ़ाई पूरी कर सिविल जज बनने के सपने को पूरा करने अपने एक दोस्त सारांश जैन के साथ तेजेंदर सिंह नाम के एक शख्स की मदद से अपने रहस्यमय ढंग से गायब होने का पूरा नाटक रचा। उसे लगा था कि गुमशुदगी को पुलिस इतनी गंभीरता से नहीं लेगी और उसे तलाश नहीं करेगी, लेकिन ऐसा हुआ नहीं, और सघन सर्चिंग के बाद उसे तलाश निकाला गया। इस पूरी कहानी में में अर्चना ने 7 अगस्त को इंदौर से कटनी के लिए नर्मदा एक्सप्रेस से रवाना होने से लेकर तेजेंदर सिंह की मदद से इटारसी स्टेशन पर उतरकर अपने दोस्त सारांश जैन के साथ उसकी कार से शुजालपुर फिर इंदौर फिर हैदराबाद पहुंचने और वहां कुछ दिन रुककर दिल्ली और फिर वहां से धनगुही नेपाल और काठमांडू जाने तक और सारांश के वापिस इंदौर लौटने की कहानी विस्तार से बताई।
सारांश के जरिए अर्चना तक पहुंची पुलिस
रेल एसपी राहुल कुमार लोढ़ा ने बताया की अर्चना के कॉल रिकॉर्ड्स के आधार पर सारांश जैन तक जीआरपी पहुंची और सारांश के जरिए नेपाल में अर्चना से संपर्क कर उसे वापस आने के लिए कहा गया। परिजनों की परेशानी को देखते हुए अर्चना जैसे ही नेपाल से भारत की बॉर्डर में लखीमपुर में दाखिल हुई उसे रेल पुलिस ने दस्तयाब कर लिया।
किसी पर कोई अपराध नहीं
गुमशुदा अर्चना के बालिग होने और किसी प्रकार का कोई अपराध घटित ना होने की वजह से रेल पुलिस द्वारा किसी पर कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है।
अब भी कई सवाल निरुत्तर
इस पूरे मामले में रेल पुलिस के सर्च ऑपरेशन और अर्चना के परिजनों द्वारा अर्चना की शादी तय किए जाने वाले प्वाइंट को नजरंदाज किया गया या ये असल कारण ही नहीं है। सवाल यह भी उठता है कि शुरू से खुले विचारों वाले परिवार में अर्चना ने सिविल जज बनने से पहले शादी न करने वाली बात सीधे परिजनों को बताने की बजाय ये रास्ता क्यों चुना। इस पूरे मामले में जीआरपी आरक्षक राम तोमर की भूमिक सिर्फ एक टिकट बुक कराने तक ही सीमित थी। एक कानून की जानकर और स्वतंत्र युवती अर्चना को क्या सिर्फ शादी से बचने के लिए इतना बड़ा नाटक रचना पड़ा या कहानी कुछ और ही है। बहरहाल अर्चना की सकुशल वापसी से परिजनों और पुलिस सहित उसके शुभचिंतकों ने राहत की सांस ली है।