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संसद में मणिपुर राज्य में जल (प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण) संशोधन अधिनियम, 2024 का राज्यसभा सांसद श्रीमती माया नारोलिया ने समर्थन किया।

नर्मदापुरम । राज्यसभा में मणिपुर राज्य में जल (प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण) संशोधन अधिनियम, 2024 को अपनाने से जुड़े वैधानिक संकल्प पर चर्चा के दौरान मध्य प्रदेश से सांसद माया नारोलिया ने इस प्रस्ताव का पूर्ण समर्थन किया। उन्होंने कहा कि जल संसाधनों की सुरक्षा न केवल वर्तमान पीढ़ी बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए भी अनिवार्य है।

राज्यसभा सांसद श्रीमती माया नारोलिया जी ने कहा कि यह संशोधन जिम्मेदार शासन की भावना को सशक्त रूप से प्रकट करता है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार की पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता की सराहना करते हुए कहा कि सरकार ने बार-बार यह साबित किया है कि आर्थिक प्रगति और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं।

राज्यसभा सांसद ने बताया कि पूर्व में मामूली तकनीकी त्रुटियों तक को अपराध की श्रेणी में लाने से उद्योगों के लिए अनावश्यक आपराधिककरण की स्थिति बनती थी। नए संशोधन में छोटे उल्लंघनों को अपराध की श्रेणी से हटाकर आर्थिक दंड का प्रावधान किया गया है, जबकि गंभीर पर्यावरणीय उल्लंघनों पर कठोर दंड का प्रावधान रहेगा। अवैध रूप से प्रदूषित जल या औद्योगिक अपशिष्ट बहाने पर अब छह से सात वर्ष तक की सजा का प्रावधान किया गया है।

श्रीमती नारोलिया जी ने कहा कि औद्योगिक प्रतिष्ठानों को स्वीकृति देने या अस्वीकृत करने से संबंधित दिशा-निर्देश जारी करने का अधिकार केंद्र सरकार को मिलने से देशभर में प्रदूषण नियंत्रण से संबंधित नीतियों में एकरूपता आएगी। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों की नियुक्तियों और सेवा शर्तों को भी केंद्रीय मानकों से जोड़कर संस्थागत ढाँचे को मजबूत किया गया है।

उन्होंने बताया कि अब दंड निर्धारण का अधिकार वरिष्ठ अधिकृत अधिकारी के पास होगा, जिससे निर्णय प्रक्रिया तेज और पारदर्शी बनेगी। अपीलों की व्यवस्था राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के माध्यम से होगी। साथ ही, दंड राशि सीधे पर्यावरण संरक्षण कोष में जमा कराई जाएगी, जिससे संरक्षण कार्यों को और मजबूती मिलेगी।

राज्यसभा सांसद माया नारोलिया जी ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध मणिपुर के लिए यह संशोधन अत्यंत आवश्यक है। इस कानून को अपनाने से मणिपुर को आधुनिक, पारदर्शी और प्रभावी पर्यावरणीय ढाँचा मिलेगा, जो विकास और पर्यावरण संरक्षण के संतुलन को मजबूत करेगा।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश जल जीवन मिशन और नदी पुनर्जीवन जैसे अभियानों के माध्यम से यह दिखा चुका है कि पर्यावरण संरक्षण राष्ट्र के भविष्य में निवेश है। यह संशोधन भी उसी राष्ट्रीय दृष्टि का हिस्सा है। अंत में उन्होंने सदन से आग्रह किया कि इस प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित किया जाए, ताकि सहकारी संघवाद को मजबूती मिले और देश की पारिस्थितिक विरासत सुरक्षित रह सके।

 

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