Social menu is not set. You need to create menu and assign it to Social Menu on Menu Settings.

NEWS INDIA 24×7

सच दिखता है

अखिल भारतीय कायस्थ समाज ने लिया आस्था और स्वच्छता का संकल्प 

1 min read

मातृशक्ति और पुरुषों ने चित्रगुप्त घाट पर किया श्रमदान

नर्मदापुरम। मां नर्मदा के प्रति आस्था और स्वच्छता के संकल्प को लेकर अखिल भारतीय कायस्थ समाज की मातृशक्ति एवं पुरुषों द्वारा चित्रगुप्त घाट पर विशेष स्वच्छता अभियान चलाया । इस दौरान समाजजनों ने घाट परिसर में श्रमदान कर फर्श पर बिखरे कचरे और गंदगी को एकत्रित कर डस्टबिन में डाला। वहीं श्रद्धालुओं के स्नान के लिए उपयोग की जाने वाली सीढ़ियों पर जमी काई की भी सफाई की गई, ताकि स्नान करने आने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी न हो और फिसलन से होने वाली दुर्घटनाओं की आशंका कम हो। इस अवसर पर नगर पालिका उपाध्यक्ष अभय वर्मा ज्योति वर्मा, राजेंद्र श्रीवास्तव, प्रोफेसर ईरा वर्मा, केशव देव वर्मा, विजय वर्मा, प्रीती खरे, सीबी खरे , श्रीमती ममता तिवारी, सुमन वर्मा , अशोक वर्मा , सुनील राय, रितु श्रीवास्तव, ऋषिकेश श्रीवास्तव, मनोज वर्मा , आदित्य वर्मा ,ऋषिकेश श्रीवास्तव, लालता प्रसाद, जानकी, सुमन वर्मा , गुनगुन सहित अनेक लोग उपस्थित थे। अभियान के दौरान नर्मदा तट पर जमा घास-फूस और अन्य गंदगी को फावड़े एवं सफाई उपकरणों की सहायता से हटाकर एक स्थान पर एकत्रित किया गया। समाजजनों ने स्वयं श्रमदान करते हुए यह संदेश दिया कि मां नर्मदा की स्वच्छता केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का नैतिक कर्तव्य है।

नर्मदा की स्वच्छता हमारी सामूहिक जिम्मेदारी : राजेंद्र श्रीवास्तव

इस अवसर पर अखिल भारतीय कायस्थ समाज के जिलाध्यक्ष राजेंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि मां नर्मदा हमारी आस्था, संस्कृति और जीवन का आधार हैं। उनकी स्वच्छता और पवित्रता बनाए रखना हम सभी का दायित्व है। केवल पूजा-अर्चना और धार्मिक आयोजनों तक ही हमारी जिम्मेदारी सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि नर्मदा घाटों को स्वच्छ रखना भी हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए।

नर्मदा संरक्षण के लिए जनभागीदारी जरूरी : प्रो. ईरा वर्मा

नर्मदा महाविद्यालय की प्रोफेसर ईरा वर्मा ने कहा कि नर्मदा केवल एक नदी नहीं बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत और जीवनदायनी है। उनके संरक्षक के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। स्वच्छता अभियान तभी सफल होगा जब लोग स्वयं अपनी आदतों में बदलाव लाएंगे और नदी एवं घाटों पर गंदगी फैलाने से बचेंगे। श्रीमती वर्मा ने कहा कि आज समाज की मातृशक्ति और पुरुष द्वारा किया गया यह श्रमदान एक सकारात्मक पहल है ।

 

About The Author